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23 July, 2021

खुशनुमा ख़्वाहिश हूँ मैं !!




पवन झखोरे से लिपटी हुई 

एक सुरमई  चाह हूँ मैं 

लहराते आँचल में सिमटी हुई 

ममता हूँ मैं 


रात के काजल में 

आँखों का वो एक पाक सपन 

तेरी खुशबू से नहाई हुई 

चंपा हूँ मैं 


आँख से कहती हुई ,

बन बन में भटकती हुई 

तेरे दीदार की हर पल में बसी 

खुशनुमा ख़्वाहिश हूँ मैं !!



अनुपमा त्रिपाठी 

''सुकृति "

19 comments:

  1. बहुत सुंदर अहसासों का सृजन

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(२४-०७-२०२१) को
    'खुशनुमा ख़्वाहिश हूँ मैं !!'(चर्चा अंक-४१३५)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    Replies
    1. सादर नमस्ते अनीता जी ,
      ह्रदय से धन्यवाद मेरी रचना के चयन हेतु !!

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  3. एक उमंग भरी प्यारी सी सुंदर रचना

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  4. आँख से कहती हुई ,

    बन बन में भटकती हुई

    तेरे दीदार की हर पल में बसी

    खुशनुमा ख़्वाहिश हूँ मैं !!

    बहुत ही सुंदर सृजन

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  5. मंत्रमुग्ध करती रचना - -

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  6. भीनी-भीनी खुशबू-सी ....

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  7. बहुत सुंदर पंक्तियाँ।

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  8. खूबसूरत अभिव्यक्ति।

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  9. आँख से कहती हुई ,

    बन बन में भटकती हुई

    तेरे दीदार की हर पल में बसी

    खुशनुमा ख़्वाहिश हूँ मै बहुत ही लाजवाब मनभावन सृजन
    वाह!!!


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  10. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 24 जुलाई 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. सादर हार्दिक धन्यवाद आपका!!

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  11. बहुत खूबसूरत भाव संयोजन ।
    खुशनुमा ख्वाहिश बनी रहना ।

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  12. बहुत सुंदर

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  13. जज़्बातों से लबरेज़ अहसास!

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  14. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति।

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  15. बहुत ही सुंदरता से सजे खूबसूरत अहसास ...

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