नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!
नमस्कार ....!!आपका स्वागत है ....!!

26 July, 2021

सावन की बहार !!


 प्रत्येक प्रात की

 लालिमा में ,

मेरी आसक्ति से 

अनुरक्त अनुरति ,


हृदय  में ,

शब्दों के आवेग-संवेग  में ,

उमड़ती घुमड़ती घटा सी ,


छमाछम झमाझम ....

बूंदों की खनक ,

मेरे आँगन ....... 

आई हुई मन द्वार ,

 नव पात में,नव प्रात में 

प्रस्फुटित हरीतिमा की कतार ,

सावन की बहार !!


ओ  कविता 

अभिनन्दन करो स्वीकार ,

तुम बरसो ऐसे ही  बार बार  ......!! 


अनुपमा त्रिपाठी 

 "सुकृति "

24 comments:

  1. कवितांजलि, वर्षा को, फुहारों सी। सुघट सृजन।

    ReplyDelete
  2. ओ कविता
    अभिनन्दन करो स्वीकार ,
    तुम बरसो ऐसे ही बार बार ......
    .. हाजिर हूँ ..
    बहुत खूब!

    ReplyDelete
  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार(२८-०७-२०२१) को
    'उद्विग्नता'(चर्चा अंक- ४१३९)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

    ReplyDelete
    Replies
    1. आपका हृदय से सादर धन्यवाद अनीता जी !!

      Delete
  4. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  5. बहुत सुंदर रचना

    ReplyDelete
  6. अप्रतिम भाव ...

    ReplyDelete
  7. सावन की कविता है, कविता का सावन है ! बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  8. Replies
    1. गगन जी सादर धन्यवाद आपकी टिपण्णी के लिए | दरअसल कई बार कुछ अजीब सी टिपण्णी भी आ जाती है इसलिए मॉडरेशन लगाया है |

      Delete
  9. स्वागत है अभिनंदन है तुम असो बार बार 😄
    ख़ूबसूर्स्ट अभिव्यक्ति

    ReplyDelete
  10. ओ कविता
    अभिनन्दन करो स्वीकार ,
    तुम बरसो ऐसे ही बार बार ......!!
    सावन की बारिश जैसी खूबसूरत अभिव्यक्ति ।

    ReplyDelete
  11. बहुत सुंदर रचना...

    ReplyDelete
  12. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete
  13. हृदय स्पर्शी रचना!!

    ReplyDelete
  14. काव्य को मधुर निमंत्रण ही काव्य का आगमन है, सुंदर रचना!

    ReplyDelete
  15. सावन की घटाओं से मनोरम संवाद करती सुंदर रचना।

    ReplyDelete
  16. जब प्रकृति रचती है अपनी कूची से कोई रचना ... वो सबसे सुंदर होती है ... बरखा भी ऐसी ही एक रचना है ...

    ReplyDelete
  17. ओ कविता

    अभिनन्दन करो स्वीकार ,

    तुम बरसो ऐसे ही बार बार।

    वाह! मुग्ध करते भाव , सुंदर शब्द चयन ।
    सुंदर सृजन।

    ReplyDelete
  18. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 09 अगस्त 2021 शाम 5.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  19. हार्दिक धन्यवाद यशोदा जी!!

    ReplyDelete

नमस्कार ...!!पढ़कर अपने विचार ज़रूर दें .....!!