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25 August, 2021

धूप भी खिली हुई

 
धूप भी खिली हुई
घूप में खिला हुआ 
रँग है बहार का 
रँग वो ख़ुमार का 

रँग वो ख़ुमार का 
अभिराम वो दुलार का, 
अभिरुप वो श्रृंगार का 
मांग की लाली में जैसे 
प्रियतम के प्यार का 
रँग वो ख़ुमार का 

उड़ेलता हुआ कभी 
बिखेरता हुआ कभी 
लहर लहर समुद्र पर
किरणों के प्यार का 
रँग वो ख़ुमार का 


अनुपमा त्रिपाठी 
 ''सुकृति ''


7 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 25 अगस्त 2021 शाम 3.00 बजे साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    Replies
    1. बहुत बहुत धन्यवाद यशोदा जी !!

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  2. बेहद खूबसूरत है ये खुमारी । सुन्दर भाव सृजन ।

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  3. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

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  4. भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  5. सुंदर भावों का अनूठा सृजन।

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  6. रंग रँगी वह प्रकृति मनोहर,
    चढ़ आयी वह सबके ऊपर।

    सुन्दर पंक्तियाँ।

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